Tuesday, January 1, 2013


गम के दरिया में कभी, डुबकी लगाके देखिये।
आते जाते ही सही,दिल से लगाके देखिये ।।


जिनकी रोज़ाना दिवाली,उनकी बातें क्या करें।
ढण्डे चूल्हे आग को तरसें, जलाके देखिये ।।


जड़ दिया ताला,कहा कि मिल में घाटा हो गया।
बर्फ सूनी आंख के, आंसू गला के देखिये।।


उनकी फितरत है ,चुभोयेगें यंू ही नश्तर सदा।
बहते नासूरों पे कुछ ,मरहम लगाके देखिये।।


आये बैठे कर गये अफसोस उनका फर्ज था।
गर्द दिल में जो जमी, उसको हटाके देखिये।

Friday, January 27, 2012

Monday, January 2, 2012

नव वर्ष...

नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ...
आओ फिर एक बार
इस आशा के साथ जिऐं
कि शायद,
मँहगाई की मार से मिल जाये निजात
घी,तेल शक्कर बार-बार नहीं दिखाऐं दॉत.
शायद,
देश के कर्णधारों को ,आ जाऐ सदबुद्धि
किसी तरह हो जाऐ उनकी आत्म शुद्धि
भ्रष्टाचार से जन की लडाई
सत्तामद की,टूटेगी तानाशाही
रोटी की चिन्ता में जन-जन बेहाल
शायद, ढूंढ लाऐ कोई जन का जन पाल ॥

डॉ.योगेन्द्र मणि

Monday, December 12, 2011

fatahsagar udaipur rajasthan

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अन्ना नहीं ये आँधी है
बिन लाठी का गाँधी है
भ्रष्ट्राचार पे लगेगा अंकुश
सबने आशा बाँधी है ॥
गाँधी ने स्वराज दिलाया
हमें लगा सुराज है आया
हर हाथों को काम मिलेगा
नेकी का ईनाम मिलेगा
हर घर में खुशियां बोयेगें
भूखे न बच्चे सोऐगें
खेतों में खुशहाली होगी
हर घर में दीवाली होगी
सपनों में अब तक जीते थे
प्यास लगी आँसू पीते थे
जनसेवक बन गये शासक
जनता उनकी बाँदी है
भ्रष्ट्राचार पे लगेगा अंकुश
सबने आशा बाँधी है ॥

Tuesday, December 6, 2011