नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ...
आओ फिर एक बार
इस आशा के साथ जिऐं
कि शायद,
मँहगाई की मार से मिल जाये निजात
घी,तेल शक्कर बार-बार नहीं दिखाऐं दॉत.
शायद,
देश के कर्णधारों को ,आ जाऐ सदबुद्धि
किसी तरह हो जाऐ उनकी आत्म शुद्धि
भ्रष्टाचार से जन की लडाई
सत्तामद की,टूटेगी तानाशाही
रोटी की चिन्ता में जन-जन बेहाल
शायद, ढूंढ लाऐ कोई जन का जन पाल ॥
डॉ.योगेन्द्र मणि




0 comments:
Post a Comment